Patna (24 अक्टूबर 2026): बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JD(U)) ने मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी के खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हुए उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी विरोधी गतिविधियों, शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी और विधान परिषद चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने के आरोप में शनिवार को उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इसके साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा भी विधानसभा अध्यक्ष से की गई है।
स्नातक चुनाव में बगावत और जनसुराज प्रत्याशी का समर्थन
हाल ही में संपन्न हुई बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव के दौरान मोकामा विधायक का बागी तेवर खुलकर सामने आया था:
नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार: पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू ने अपने वरिष्ठ नेता नीरज कुमार को मैदान में उतारा था। हालांकि, अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार के खिलाफ जाकर जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का खुलकर समर्थन किया और उनकी नामांकन यात्रा में भी शामिल हुए।
पुरानी राजनीतिक अदावत: नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच साल 2015 से ही गहरी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता रही है। 2015 में टिकट कटने के बाद अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़कर नीरज कुमार को शिकस्त दी थी।
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पर दिया विवादित बयान
हाल ही में अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच के विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को सौंपी गई थी। हालांकि, 23 अक्तूबर को मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल पर अनंत सिंह ने केंद्रीय मंत्री को लेकर बेहद तल्ख और विवादित टिप्पणी की।
मीडिया के पूछने पर कि ललन सिंह किसके साथ हैं, अनंत सिंह ने कहा था— “कौन ललन सिंह की बात कर रहे हैं? बिहार में 100 ललन सिंह हैं। हम उनको नहीं जानते हैं।” हालांकि, इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी आस्था बरकरार रखते हुए उन्हें अपना “भगवान” बताया था।
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष ने जारी किया निष्कासन आदेश
जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने शनिवार को औपचारिक आदेश जारी कर कार्रवाई की पुष्टि की। आदेश में कहा गया है कि:
- पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करने,
- पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने, और
- विधान परिषद चुनाव में आधिकारिक उम्मीदवार के विरुद्ध जाकर विरोधी दल के प्रत्याशी का प्रचार करने के कारण यह कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया गया है।
अनंत सिंह के सियासी उतार-चढ़ाव और आपराधिक मामले
अनंत सिंह का राजनीतिक सफर हमेशा से विवादों और उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
जेल से वापसी: साल 2015 में पुटुस हत्याकांड के बाद वे पहली बार जेल गए थे, जिसके बाद उन्होंने 2017 में जेडीयू से नाता तोड़कर राजद (RJD) का दामन थाम लिया था।
2024-25 में घर वापसी: पटना हाईकोर्ट के आदेश पर राहत मिलने के बाद वे साल 2025 में दोबारा जेडीयू में शामिल हुए और विधानसभा चुनाव लड़ा।
आपराधिक मामले: पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान जनसुराज के एक समर्थक की हत्या के मामले में उनका नाम सामने आया था और वे जेल में भी रहे। हालांकि, बीते मार्च महीने में उन्हें नियमित जमानत मिल गई थी।
मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद एनडीए सरकार और जेडीयू नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि पार्टी अनुशासनहीनता और शीर्ष नेतृत्व के प्रति अमर्यादित आचरण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



