New Delhi, (12 अक्टूबर 2026): मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद को लेकर दिल्ली की सड़कों पर घमासान जारी है। विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन द्वारा सोमवार को निकाले गए विरोध मार्च से ठीक पहले वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने वकीलों के एक दल के साथ सुप्रीम कोर्ट से बाराखंबा मेट्रो स्टेशन तक मार्च निकाला। सिंघवी ने मार्च से जुड़ी एक तस्वीर साझा करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “चलो दिल्ली, लोकतंत्र की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट से बाराखंबा तक इस मार्च में शामिल हों।”
‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पाबंदी सरकार के डर का प्रतीक’
मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन द्वारा जगह-जगह लगाई गई पाबंदियों पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा, “आप सब देख रहे होंगे कि हम सभी सिर्फ एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक मार्च निकालना चाहते हैं, लेकिन सरकार ने इस पर अनगिनत पाबंदियां लगा दी हैं। बिना किसी कारण के मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए, ट्रेनें रोकी गईं और इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गईं, जिससे आम जनता को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है।”
उन्होंने केंद्र सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह पहले से ही थोपी गई एक व्यापक और कठोर पाबंदी है। अगर कहीं कोई हिंसा या तोड़फोड़ हुई होती तो पाबंदी समझ में आती, लेकिन किसी भी प्रदर्शनकारी ने ऐसा कुछ नहीं किया है। सच तो यह है कि सत्ता में बैठे लोग जन-आक्रोश से डरे हुए हैं। वे भूल रहे हैं कि भारतीय संविधान देश के हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का मौलिक अधिकार देता है।”
विपक्षी मार्च और वकीलों का समर्थन
उल्लेखनीय है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में विपक्षी दलों ने बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का आह्वान किया है। सिंघवी के साथ बड़ी संख्या में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं ने भी इस मार्च में हिस्सा लेकर विपक्ष और प्रदर्शनकारी संगठनों को अपना नैतिक समर्थन दिया।



