New Delhi (12 अक्टूबर 2026): मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को चरम पर पहुँच गया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और छात्र नेता नेहा बोरा समेत विपक्षी नेताओं की अगुवाई में निकाला जा रहा मार्च जैसे ही सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा, दिल्ली पुलिस ने मंडी हाउस के पास कड़े बैरिकेड्स लगाकर इसे रोक दिया।
मंडी हाउस के पास पुलिस से धक्का-मुक्की, सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारी
मार्च रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की देखने को मिली। पुलिस ने भीड़ को पीछे धकेलने और भगवान दास रोड पर धारा 163 लागू होने की घोषणा की। हालांकि, इसके बावजूद विपक्षी नेता और बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। कुछ देर विरोध जताने के बाद प्रदर्शनकारी शाम छह बजे के करीब वापस लौटते हुए इंडिया गेट की ओर मुड़ गए।
इससे पहले, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य वरिष्ठ नेता एक बस में सवार होकर बाराखंबा मेट्रो स्टेशन पहुँचे थे, जहाँ से हज़ारों की संख्या में छात्र, कार्यकर्ता, वामदल के प्रतिनिधि और वकील इस मार्च में शामिल हुए। बाराखंबा से मंडी हाउस तक का पूरा इलाका तिरंगे झंडों और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पट गया था।
सुप्रीम कोर्ट में CEC के खिलाफ संयुक्त याचिका दाखिल
सड़कों पर जारी इस सियासी घमासान के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में औपचारिक याचिका भी दाखिल कर दी गई है। इस याचिका में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने और चुनावी प्रक्रियाओं में गंभीर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।
इस महत्वपूर्ण याचिका पर कुल 11 प्रमुख विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर हैं, जिनमें शामिल हैं:
राहुल गांधी (लोकसभा में विपक्ष के नेता)
मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा में विपक्ष के नेता)
अखिलेश यादव (राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी)
तेजस्वी प्रसाद यादव (नेता, राष्ट्रीय जनता दल)
सौगत रॉय (तृणमूल कांग्रेस, TMC)
अन्य विपक्षी दलों के शीर्ष नेता।
विपक्षी दलों का साफ कहना है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त पद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहने पर नैतिक आधार पर इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका यह विरोध कानूनी और लोकतांत्रिक दोनों मोर्चों पर जारी रहेगा।



