Berlin/ New Delhi (23 अक्टूबर 2026): जर्मनी के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक पर्यावरण संकट को लेकर पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये पर सीधा हमला बोला है। बर्लिन में ‘इंडो-जर्मन बिजनेस फोरम’ और ‘राउंडटेबल ग्लोबल डायलॉग’ को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों के जरिए यह साबित किया कि दुनिया में प्रदूषण फैलाने के असली जिम्मेदार यूरोपीय और विकसित देश ही हैं।
“ओजोन को नुकसान किसने पहुंचाया?” – पीयूष गोयल के कड़े सवाल
बर्लिन के मंच से कूटनीतिक कड़ाई दिखाते हुए केंद्रीय मंत्री ने विकसित मुल्कों की नीतियां पर सवाल उठाए:
“पर्यावरण की यह बदहाली आखिर किसकी देन है? वायुमंडल में अत्यधिक कार्बन की मात्रा किसने बढ़ाई? सच यह है कि इस गंभीर समस्या के जनक आप खुद हैं, लेकिन आज उपदेश बाकी दुनिया को दिए जा रहे हैं।”
जनसंख्या और प्रदूषण: भारत बनाम यूरोप का वास्तविक गणित
ग्लोबल वार्मिंग में अलग-अलग क्षेत्रों की भूमिका को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट तथ्य रखे:
भारत का संतुलित रिकॉर्ड: दुनिया की कुल 17 फीसदी आबादी भारत में रहती है, इसके बावजूद वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में देश का हिस्सा 3 प्रतिशत से भी कम है।
यूरोप का भारी पर्यावरणीय असर: संपूर्ण यूरोप की आबादी दुनिया का महज 3 से 4 प्रतिशत है, लेकिन प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामले में वह भारत से 7 से 8 गुना आगे है।
प्रति व्यक्ति तुलना: वर्तमान समय में भी भारत में एक व्यक्ति का औसतन कार्बन योगदान किसी यूरोपीय नागरिक के मुकाबले 10 से 15 फीसदी ही बैठता है।
1.4 अरब नागरिकों की जरूरतें और स्वच्छ ऊर्जा
गोयल ने जोर देकर कहा कि 140 करोड़ से अधिक देशवासियों की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार की प्राथमिकता है। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत वेस्ट मैनेजमेंट, सर्कुलर इकोनॉमी और ग्रीन एनर्जी (Clean Energy) को अपनाने में दुनिया के कई विकसित देशों से कहीं आगे और प्रतिबद्ध है।



