New Delhi: भारतीय सशस्त्र बलों की सुरक्षा और परिचालन तैयारियों को नई दिशा देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने शीर्ष नेतृत्व में महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की है. एक ओर जहाँ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें थल सेना प्रमुख (COAS) का पदभार ग्रहण किया है, वहीं दूसरी ओर एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है. वे 31 अक्तूबर को एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद वायुसेना की कमान संभालेंगे.
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की पृष्ठभूमि
जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के सबसे अनुभवी और रणनीतिक सोच रखने वाले सैन्य अधिकारियों में गिने जाते हैं. तीन दशकों से अधिक के अपने लंबे और शानदार सैन्य करियर में उन्होंने विभिन्न ऑपरेशनों और महत्वपूर्ण कमान पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं. उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियाँ और पश्चिमी व उत्तरी सीमाओं पर सतर्कता सर्वोच्च प्राथमिकता है. रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धीरज सेठ का अनुभव सेना के आधुनिकीकरण और थियेटर कमांड जैसी नई पहलों को तेज़ी देने में बेहद कारगर साबित होगा.
अगले वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित
आगामी 31 अक्तूबर से भारतीय वायुसेना का नेतृत्व करने जा रहे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित एक अत्यंत अनुभवी फाइटर और टेस्ट पायलट हैं. उनके पास मिराज-2000, मिग वेरिएंट्स, जगुआर और स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों सहित कई तरह के एयरक्राफ्ट उड़ाने का 3,500 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव हैएयर मार्शल दीक्षित कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं. उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (CISC) और वायुसेना उप-प्रमुख (Vice Chief of Air Staff) जैसी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ भी निभाई हैं
आत्मनिर्भर भारत’ और सैन्य आधुनिकीकरण पर ज़ोर
दोनों ही सैन्य प्रमुखों के कंधों पर भारतीय रक्षा बलों के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने की बड़ी ज़िम्मेदारी होगी. एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को वायुसेना में स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं, विशेषकर एलसीए तेजस (LCA Tejas) के विकास और शामिल किए जाने का बड़ा समर्थक माना जाता है.थल सेना और वायुसेना के इस नए नेतृत्व से भारतीय सेनाओं की अंतर-सेवा समन्वय (Inter-service coordination) और युद्ध क्षमताओं में और अधिक सुधार होने की उम्मीद है.



