Washington/ New Delhi (16 अक्टूबर 2026): भारत में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल (Pramila Jayapal) को भारत सरकार ने कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने गुरुवार को प्रमिला जयपाल के बयान पर पलटवार करते हुए इसे भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप करार दिया।
भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा का कड़ा रुख
भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि भारत की लोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर बाहरी टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लिखा:
“भारत की चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर प्रमिला जयपाल की टिप्पणियां देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत एक मजबूत और जीवंत लोकतंत्र है, जहां स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएं मौजूद हैं और देश का स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराने का दीर्घकालिक रिकॉर्ड रहा है।”
राजदूत ने यह भी जोड़ा कि यदि अमेरिकी सांसद को कोई गलतफहमी है, तो भारत उनकी भ्रांतियों को दूर करने के लिए रचनात्मक बातचीत (Constructive Engagement) करने के लिए हमेशा तैयार है।
प्रमिला जयपाल ने क्या कहा था?
दरअसल, अमेरिकी कांग्रेस की सदस्य प्रमिला जयपाल ने भारत में चलाए जा रहे एसआईआर (SIR) अभियान की आलोचना करते हुए इसे ‘लोकतंत्र-विरोधी कदम’ बताया था।
उन्होंने अमेरिका की घरेलू राजनीति से इसकी तुलना करते हुए आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही लगती है, जैसी अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा नागरिकों के मतदान के अधिकार (Voting Rights) को कमजोर करने के लिए की जा रही है।
भारत का स्पष्ट संदेश
भारत सरकार ने लगातार यह रुख कायम रखा है कि देश की चुनावी प्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और संवैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़े मामले पूरी तरह भारत के संप्रभु अधिकार क्षेत्र में आते हैं। विदेश मंत्रालय और राजनयिक स्तर पर यह साफ कर दिया गया है कि विदेशी राजनेताओं द्वारा भारत की आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बिना तथ्यों के बयानबाज़ी स्वीकार्य नहीं है।


