New Delhi (13 अक्टूबर 2026): लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट (SC) में उस समय एक तकनीकी अड़चन का सामना करना पड़ा, जब शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री ने चुनाव आयोग के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन/रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को कुछ कमियों (डिफेक्ट्स) के कारण वापस कर दिया। अब उनके कानूनी सलाहकारों को इन त्रुटियों को दूर करके याचिका को दोबारा फाइल करना होगा।
क्या है वकीलों का पक्ष?
राहुल गांधी की कानूनी टीम की ओर से कहा गया कि यह अदालत में एक बेहद सामान्य और नियमित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर होने वाली कई याचिकाएं पहली बार में ही पूरी तरह स्वीकार नहीं की जाती हैं, और रजिस्ट्री उनमें तकनीकी संशोधन या सुधार के निर्देश देती है। संशोधित याचिका को जल्द ही तय नियमों के तहत दोबारा रजिस्ट्री में जमा कर दिया जाएगा।
याचिका में की गई हैं ये बड़ी मांगें
राहुल गांधी द्वारा सोमवार शाम को दायर की गई इस याचिका में चुनाव आयोग के एसआईआर से जुड़े तमाम फैसलों का पूरा रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश करने की गुहार लगाई गई है। साथ ही, यह जांच करने की मांग की गई है कि क्या चुनाव आयोग के ये फैसले संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हैं या नहीं।
याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई गई हैं:
स्वतंत्र ऑडिट कमेटी: एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए जो एसआईआर की वजह से मतदाता सूचियों में हुए संशोधनों की निष्पक्ष जांच (ऑडिट) करे।
पारदर्शिता: देश भर में जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
बिना नोटिस नाम हटाने पर रोक: किसी भी मतदाता का नाम बिना पूर्व सूचना और नोटिस के वोटर लिस्ट से न हटाया जाए।
अंतरिम रोक: अदालत एसआईआर की प्रक्रिया पर फिलहाल अंतरिम रोक लगाए।



