New Delhi (14 अक्टूबर 2026): ब्रिटेन की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा व खुफिया एजेंसी एमआई5 (MI5) के प्रमुख केन मैककैलम (Ken McCallum) ने एक वार्षिक संबोधन में दुनिया भर में बढ़ते वैश्विक सुरक्षा खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस वर्तमान में ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों के लिए सबसे बड़ा और आक्रामक सुरक्षा खतरा बन चुका है। इसके अलावा उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का आतंकवाद में बढ़ता इस्तेमाल और ईरान से मिलने वाली चुनौतियों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
कोल्ड वॉर से भी ज्यादा संसाधन लगा रही MI5
मैककैलम ने रूस को “आक्रामक नंबर एक” करार देते हुए बताया कि रूसी खतरों से निपटने के लिए एमआई5 अब शीत युद्ध (Cold War) के दौर से भी अधिक संसाधन और तंत्र लगा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में विदेश से जुड़े सुरक्षा खतरों में चार गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। अब आतंकवाद और विदेशी जासूसी/खतरों से निपटने का काम एजेंसी के लिए लगभग समान स्तर पर पहुंच गया है।
एआई (AI) और ड्रोन से हमले की कोशिशें
एमआई5 प्रमुख ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि एजेंसी ने ऐसे आतंकियों और संदिग्धों को पकड़ा है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे थे। कुछ मामलों में एआई तकनीक को ड्रोन सिस्टम से जोड़कर हमले अंजाम देने के प्रयास भी किए गए।
रूस की ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ रणनीति और किराए के अपराधी
रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध के बाद बड़ी संख्या में रूसी जासूसों को ब्रिटेन और यूरोपीय देशों से निष्कासित कर दिया गया, जिससे क्रेमलिन का पारम्परिक नेटवर्क कमजोर पड़ा है। अब रूस नेटो (NATO) देशों के साथ सीधे सैन्य संघर्ष के बजाय ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ (स साइबर हमले, फर्जी सूचनाएं और भाड़े के अपराधी) का सहारा ले रहा है। एमआई5 के अनुसार, रूस अब अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए स्थानीय अपराधियों को पैसे देकर उनका इस्तेमाल करने में लगा है।



