Prayagraj, UP (14 October 2026): उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर आज (14 अक्टूबर) इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक बेहद अहम और निर्णायक सुनवाई होने जा रही है। प्रदेश में लोकतंत्र की सबसे छोटी और बुनियादी इकाई के चुनाव में हो रही देरी, पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के आंकड़ों और ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की तैनाती जैसे ज्वलंत राजनीतिक व प्रशासनिक मुद्दों पर अदालत का क्या रुख रहता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
OBC आरक्षण आयोग का सर्वे और आंकड़ों की पड़ताल
हाईकोर्ट की पीठ के समक्ष राज्य सरकार द्वारा गठित पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग द्वारा कराए गए ट्रिपल टेस्ट सर्वे और जुटाए गए जनसांख्यिकीय आंकड़ों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होगी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि आरक्षण की सीमा तय करने और चक्रानुक्रम (rotation) प्रक्रिया लागू करने में पारदर्शिता तथा नियमों का पूर्ण पालन नहीं किया गया है। वहीं, राज्य सरकार अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश कर चुनाव जल्द से जल्द कराने का पक्ष रखेगी।
ग्राम प्रधानों की जगह प्रशासकों की नियुक्ति पर घमासान
पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों के अधिकारों को सीज कर ब्लॉक स्तर के अधिकारियों/प्रशासकों (Administrators) को जिम्मेदारी सौंपे जाने का मामला भी कानूनी दांव-पेच में उलझा हुआ है। विपक्षी दलों और पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रशासकों के जरिए ग्रामीण विकास निधि का दुरुपयोग किया जा रहा है और चुनाव टालकर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है।
राजनीतिक हलकों में हलचल, फैसले पर टिका भविष्य
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से पंचायत चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस समेत सभी प्रमुख दल हाईकोर्ट के रुख का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। आज की सुनवाई से यह साफ हो सकता है कि प्रदेश में पंचायत चुनावों की अधिसूचना कब तक जारी होगी।



