Meerut, UP (14 October 2026): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर को झकझोर देने वाले सनसनीखेज सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने आखिरकार न्याय का बड़ा फैसला सुना दिया है। मेरठ की एक विशेष अदालत ने अपने पति की हत्या कर शव को ड्रम में कंक्रीट से छिपाने के जुर्म में मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड (फांसी की सजा) और 20-20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अन्य धाराओं में दोनों को 7 साल की कैद की सजा भी दी गई है।
जिला जज अरविंद कुमार ने करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की कार्यवाही में जुड़े दोनों अभियुक्तों के चेहरे पर खामोशी और घबराहट साफ देखी गई।
क्या था पूरा मामला? (मार्च 2025 की वो खौफनाक रात)
घटना मार्च 2025 की है, जब मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा हुआ था। 29 वर्षीय सौरभ राजपूत लंदन में कार्यरत थे और फरवरी 2025 में ही भारत लौटे थे। सौरभ के परिजनों द्वारा गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने जब छानबीन शुरू की, तो परत-दर-परत एक खौफनाक साजिश सामने आई। पुलिस जांच में पता चला कि 3-4 मार्च की रात को मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ के खाने में बेहोशी की दवा मिला दी थी। इसके बाद जब वे अचेत हो गए, तो साहिल ने उन्हें पकड़कर रखा और मुस्कान ने चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उनकी हत्या कर दी।
शव को ड्रम में भरकर शिमला घूमने निकल गए थे आरोपी
हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। साक्ष्य मिटाने के लिए उन्होंने कमरे को ब्लीचिंग पाउडर से साफ किया। इसके बाद बाजार से एक बड़ा प्लास्टिक का ड्रम और सीमेंट खरीदकर सौरभ के शव को उसमें डालकर सीमेंट और रेत के घोल से भर दिया। शव ठिकाने लगाने के बाद दोनों बेखौफ होकर शिमला, मनाली और कसौली की सैर करने निकल गए थे।
17 मार्च को जब मुस्कान वापस लौटी और उसकी छह वर्षीय बेटी ने पिता के बारे में पूछा, तो उसने नाटक करना शुरू किया। बाद में जब परिजनों और पुलिस के सामने कड़ाई से पूछताछ हुई, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने घर से ड्रम काटकर शव बरामद किया था।
पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया
फैसले से पहले मृतक सौरभ के बड़े भाई राहुल (बब्लू) ने कहा था कि उनकी परिवार की शुरुआत से ही यही मांग थी कि दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाया जाए। वहीं, समाज और परिवार के लिए इस घृणित कृत्य को अंजाम देने वाले दोनों आरोपियों के परिजनों ने भी अदालत से कड़ी से कड़ी सजा की मांग की थी।
इस बहुचर्चित मामले में अदालत के इस कड़े फैसले से न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।



