Prayagraj, UP (14 October 2026): उत्तर प्रदेश में लंबे समय से टल रहे पंचायत चुनावों को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय (इलाहाबाद हाईकोर्ट) ने एक अहम और बड़ा आदेश दिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को आगामी तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया संपन्न कराने का स्पष्ट निर्देश दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत वर्तमान में प्रशासक बने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को चुनाव होने तक पद पर बने रहने की अनुमति दे दी है।
3 घंटे की मैराथन सुनवाई के बाद आया फैसला
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने बुधवार को याचिकाओं पर लगभग तीन घंटे की गहन सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। याचिकाएं अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन और दशरथ यादव समेत कई अन्य लोगों की ओर से दाखिल की गई थीं।
क्या थी मुख्य विवाद की वजह?
मामले में मुख्य याचिकाकर्ता और अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन ने बताया कि फरवरी 2026 में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने वाला था, जिसके चलते उन्होंने समय पर चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण में देरी: मतदाता सूची (Voter List) के विशेष पुनरीक्षण की समयसीमा बार-बार बढ़ाए जाने के कारण निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रहा था।
प्रशासकों की नियुक्ति पर विवाद: पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया था। सरकार के इस फैसले को भी कई याचिकाओं के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
हाईकोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए फैसला दिया कि राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराएं जाएं। साथ ही, जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते और नए प्रतिनिधि नहीं चुन लिए जाते, तब तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपना काम संभालते रहेंगे।
इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं और राज्य निर्वाचन आयोग जल्द ही नई समयसीमा के अनुसार चुनाव तैयारियों को अंतिम रूप देगा।



