New Delhi (15 अक्टूबर 2026) दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर संयुक्त राष्ट्र (UN) और भारत के बीच कूटनीतिक तनातनी बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) द्वारा जताई गई चिंता और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग को भारत ने सिरे से खारिज करते हुए इसे देश के आंतरिक मामलों में गैर-जरूरी हस्तक्षेप करार दिया है।
‘यूएन का रवैया बेहद सिलेक्टिव’- विदेश मंत्रालय
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि संयुक्त राष्ट्र की यह टिप्पणी पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने यूएन के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा:
“हमने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में साफ किया है कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से जताई गई चिंताएं बेवजह हैं और इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने जैसा है। ऐसा लगता है कि उनका रवैया बहुत ज्यादा सिलेक्टिव है, क्योंकि उन्होंने दुनिया के दूसरे हिस्सों में हो रहे प्रदर्शनों या कानूनी एजेंसियों की कार्रवाई पर न तो कोई प्रतिक्रिया दी है और न ही सार्वजनिक रूप से कुछ कहा है।”
वैश्विक विश्वसनीयता पर उठेगा सवाल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र का रवैया इसी तरह पक्षपातपूर्ण और सिलेक्टिव रहा, तो इससे बहुपक्षीय व्यवस्था (Multilateral System) में विभिन्न देशों का विश्वास कमजोर होगा और एक संस्था के रूप में यूएन की अपनी साख और विश्वसनीयता भी कम होगी।
क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई पर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन ने हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने की मांग की थी, जिस पर भारत ने सख्त ऐतराज जताया है।



