Washington / New Delhi (15 अक्टूबर 2026): भारत में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। भारतीय मूल की अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल (Pramila Jayapal) ने मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने की रिपोर्टों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र-विरोधी प्रयास” करार देते हुए इसकी तुलना अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कदमों से की है।
‘ट्रंप प्रशासन जैसी ही हथकंडे अपना रही भारत सरकार’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने लिखा:
“मैं भारत सरकार की ओर से 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई को लेकर बहुत चिंतित हूं। यह उसी तरीके जैसा लगता है, जिसे ट्रंप प्रशासन यहां अमेरिका में लोगों के मतदान के अधिकार को कमजोर करने के लिए अपना रहा है।”
शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का किया समर्थन
प्रमिला जयपाल ने विश्व स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की वकालत करते हुए कहा कि हर जगह लोकतंत्र की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा:
“भारत के लोगों को भी, अमेरिका के लोगों की तरह, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का अधिकार है। ऐसे समय में बिना हिंसा वाले विरोध प्रदर्शन करना बहुत जरूरी है। मैं भारत के उन लोगों के साथ खड़ी हूं, जो लोकतंत्र के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों का विरोध करने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।”
क्या है विवाद का मुख्य कारण?
गौरतलब है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची के सत्यापन के बाद बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने के दावे सामने आए हैं। इसे लेकर राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में विपक्षी दल और सामाजिक संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया फर्जी, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए नियमित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।



