Islamabad /Pakistan, New Delhi (15 October 2026): पाकिस्तान में राजनीतिक और संवैधानिक संकट एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के गढ़ माने जाने वाले खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया गया है और वहां की चुनी हुई प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया है। प्रांतीय मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के गृहनगर बारा में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं और आंसू गैस के गोले दागे गए हैं।
‘आतंकवाद के खतरे’ का हवाला, लेकिन विपक्ष ने बताया राजनीतिक साजिश
पाकिस्तान सरकार के अनुसार, संविधान के तहत यह कदम प्रांत की आबादी को आतंकवाद के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया था। संघीय सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने दावा किया कि पीटीआई की केपीके सरकार आतंकवादियों के साथ मिलीभगत कर रही थी। हालांकि, सरकार की ओर से इस दावे के पक्ष में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि इस कार्रवाई का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पिछले एक सप्ताह से चल रहे हजारों समर्थकों के ‘लॉन्ग मार्च’ और बढ़ते राजनीतिक दबाव को कुचलने के लिए उठाया गया है।
मुख्यमंत्री हिरासत में, पीटीआई नेता भूमिगत
सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को ‘सुरक्षा कारणों’ से हिरासत में लिया गया है, जबकि पार्टी का कहना है कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इस दमनकारी कार्रवाई के चलते प्रांत में पीटीआई के अधिकांश शीर्ष नेता छिप गए हैं। हालांकि, दो दिन के अंतराल के बाद पेशावर और केपीके के अधिकांश हिस्सों में स्कूल और इंटरनेट सेवाएं दोबारा बहाल कर दी गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव बरकरार है।
सेना के पक्ष में झुका सत्ता का संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े फैसले के पीछे पाकिस्तानी सेना का हाथ है। विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता का संतुलन पूरी तरह से सेना के पक्ष में झुक गया है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के दमनात्मक कदमों से देश में राजनीतिक अस्थिरता और अधिक गहरी हो सकती है, जिससे आने वाले समय में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।



