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मक्का मस्जिद में अनैतिक कृत्य के आरोप में 2 बांग्लादेशियों को फांसी; सऊदी अरब से बांग्लादेश ने मांगा जवाब

Bangladesh Saudi Arabia Execution Vienna Convention
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Dhaka/ New Delhi (19 अक्टूबर 2026): पवित्र शहर मक्का की एक मस्जिद में कथित तौर पर अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने के आरोप में सऊदी अरब द्वारा दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव उत्पन्न हो गया है। बांग्लादेश सरकार ने जेद्दाह स्थित अपने वाणिज्य दूतावास के माध्यम से सऊदी विदेश मंत्रालय को कड़ा पत्र लिखकर पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण और जवाब मांगा है।

बिना सूचना फांसी देने पर वियना कन्वेंशन के उल्लंघन के आरोप

इस घटनाक्रम के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सऊदी अरब की कार्रवाई प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दूतावास को नहीं दी गई जानकारी: जेद्दाह में बांग्लादेशी दूतावास के सूत्रों ने पुष्टि की है कि सऊदी अधिकारियों ने दोनों नागरिकों की गिरफ्तारी, मुकदमे की सुनवाई और उन्हें मृत्युदंड दिए जाने से जुड़ी कोई भी सूचना बांग्लादेशी मिशन के साथ साझा नहीं की थी।

अनुच्छेद 36 का उल्लंघन: 1961 के वियना कन्वेंशन (कांसुलर संबंधों पर अंतरराष्ट्रीय समझौता) के तहत, यदि किसी विदेशी नागरिक को किसी देश में गिरफ्तार किया जाता है या मौत की सजा सुनाई जाती है, तो उसके गृह देश के दूतावास को तुरंत सूचित करना अनिवार्य होता है ताकि उसे कानूनी मदद और कांसुलर सहायता मिल सके। विशेषज्ञों का आरोप है कि सऊदी अरब ने इस नियम का सीधे तौर पर उल्लंघन किया है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों और पूर्व राजनयिकों के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिल रहे हैं:

वियना प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य: बीआरएसी (BRAC) इमिग्रेशन विभाग के प्रमुख शरीफुल हसन और यूके स्थित अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ डॉ. रेहान रशीद के अनुसार, यह संभव ही नहीं है कि एक दिन में मुकदमे की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो गई हो। सऊदी अरब को यह साबित करना होगा कि उसने दोनों नागरिकों को कानूनी सहायता लेने का विकल्प दिया था या नहीं।

घरेलू कानून बनाम अंतरराष्ट्रीय बाध्यता: दूसरी ओर, बांग्लादेश के पूर्व राजदूत हुमायूं कबीर का मानना है कि किसी देश की अपनी कानूनी प्रक्रिया में विदेशी दूतावास की सीधी मध्यस्थता की बाध्यता हमेशा नहीं होती, हालांकि जानकारी मांगें जाने पर उत्तर देना कूटनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा है।

शवों की वापसी और परिवारों की अनभिज्ञता

सऊदी प्रेस एजेंसी द्वारा देश के गृह मंत्रालय के हवाले से खबर सार्वजनिक किए जाने तक मृत नागरिकों के परिवारों को भी इस फैसले की भनक नहीं थी। आधिकारिक जानकारी के अभाव में बांग्लादेशी दूतावास पीड़ितों के परिजनों से संपर्क करने और शवों को स्वदेश लाने की प्रक्रिया शुरू करने में असमर्थ महसूस कर रहा है।

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