Albanian/ New Delhi (19 अक्टूबर 2026): दक्षिण-पूर्वी यूरोपीय देश अल्बानिया में हालात पूरी तरह बेकाबू हो चुके हैं। राजधानी तिराना सहित देश के प्रमुख शहर पिछले सात दिनों से भीषण और हिंसक सरकार विरोधी प्रदर्शनों की चपेट में हैं। 13 अक्टूबर 2026 को भड़का यह जन-आक्रोश आज 19 अक्टूबर 2026 को लगातार सातवें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। छात्र, युवा और आम नागरिक सड़कों पर उतरकर प्रधानमंत्री एदी रामा की सरकार को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहे हैं।
विरोध प्रदर्शनों के तीन मुख्य कारण
छात्रों और युवाओं का भारी असंतोष: इस जन-आंदोलन की मुख्य कमान युवाओं और छात्रों के हाथों में है। विश्वविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली, शिक्षा बजट में की गई कटौती, आसमान छूती फीस और पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार का न होना युवाओं के गुस्से की मुख्य वजह है।
जारेड कुशनर के लक्जरी प्रोजेक्ट पर घमासान: दरअसल, इस असंतोष की पटकथा महीनों पहले ही लिखी जा चुकी थी। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जारेड कुशनर (Jared Kushner) से जुड़े एक लक्जरी तटीय रिज़ॉर्ट प्रोजेक्ट के लिए अल्बानिया के महत्वपूर्ण समुद्र तट को बेचे जाने पर विवाद खड़ा हुआ था। पर्यावरणविदों और आम जनता का आरोप है कि इस सौदे में बड़ा भ्रष्टाचार और अपारदर्शिता बरती गई।
महंगाई और लगातार भ्रष्टाचार के आरोप: समय के साथ यह छात्र आंदोलन बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन के गहराते संकट और 2013 से सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री एदी रामा के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक राष्ट्रीय जनांदोलन में तब्दील हो गया।
आगजनी, रबर की गोलियां और 100 से ज्यादा घायल
सड़कों पर उतरी बेकाबू भीड़ ने सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया है:
सरकारी इमारतों में तोड़फोड़: प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय, आंतरिक मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट और कई प्रमुख बैंकों की इमारतों को निशाना बनाते हुए आगजनी की है।
पुलिस की कड़ी कार्रवाई: दंगा-रोधी पुलिस उपद्रवियों पर आंसू गैस, वॉटर कैनन और पहली बार रबर की गोलियों का इस्तेमाल कर रही है। प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पथराव और पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं। इस आमने-सामने के टकराव में 100 से अधिक पुलिसकर्मी और दर्जनों नागरिक घायल हो चुके हैं, जबकि सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पीएम एदी रामा का रुख: ‘इस्तीफा नहीं दूंगा, साजिश है’
चौथी बार सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री एदी रामा ने साफ कर दिया है कि वे प्रदर्शनकारियों के दबाव में इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन हिंसक प्रदर्शनों के पीछे “विदेशी शक्तियों” का हाथ है जो देश में अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं। रामा ने आगाह किया कि यह हिंसा अल्बानिया के यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने की कोशिशों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
उल्लेखनीय है कि इस समय केवल अल्बानिया ही नहीं, बल्कि फ्रांस, इटली और बेल्जियम जैसे कई यूरोपीय मुल्कों में भी महंगाई और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जन-आक्रोश चरम पर है।



