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टाइगर श्रॉफ ही थे असली निशाने पर; मुंबई क्राइम ब्रांच का खुलासा, BNS की धारा 111 (सजा-ए-मौत) जोड़ी गई

Tiger Shroff Security Threat Mumbai Crime Branch
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Mumbai (22 अक्टूबर 2026):  बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हाल ही में हुए जानलेवा हमले और सुरक्षा खतरे के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। क्राइम ब्रांच के सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान यह स्वीकार कर लिया है कि इस साजिश का मुख्य निशाना टाइगर श्रॉफ ही थे। इससे पहले ऐसी चर्चाएं थीं कि निशाने पर सलमान खान, अमिताभ बच्चन और आमिर खान जैसे दिग्गज कलाकार भी हो सकते हैं, लेकिन पुलिस की जांच में यह साफ हो गया है कि टाइगर श्रॉफ ही उनके मुख्य रडार पर थे।

घर, जिम और ग्राउंड की लंबे समय से हो रही थी रेकी

मुंबई क्राइम ब्रांच की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पिछले कई दिनों से टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए थे

रेकी: आरोपी लगातार टाइगर के आवास, उनके जिम और फुटबॉल ग्राउंड की रेकी कर रहे थे।

शक से बचने की चाल: पुलिस के मुताबिक, स्थानीय लोगों और ऑटो-रिक्शा चालकों को गुमराह करने के लिए आरोपी ऐसा बर्ताव करते थे मानो वे आम पर्यटकों की तरह मुंबई घूमने आए हों। इस दौरान उन्होंने अन्य बॉलीवुड सितारों (अक्षय कुमार, शाहरुख खान, सलमान खान आदि) के घरों के इर्द-गिर्द भी मूवमेंट की ताकि किसी को असली साजिश का शक न हो।

होटल में हुआ था मिसफायर, शूटिंग की थी प्रैक्टिस

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने मुंबई के पास किसी सुनसान जगह पर हथियार चलाने की प्रैक्टिस की थी। इसके अलावा, अंधेरी स्थित एक होटल के कमरे में हथियार चेक करते वक्त बंदूक अचानक मिसफायर भी हो गई थी। गौरतलब है कि टाइगर पर फायरिंग के दौरान भी सीसीटीवी फुटेज में एक बदमाश की बंदूक फंसते हुए नजर आई थी।

BNS की धारा 111 जुड़ी; अब होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई

इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुंबई पुलिस ने एक बहुत बड़ा कानूनी कदम उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 (संगठित अपराध / Organized Crime) जोड़ दी है। इससे पहले इस मामले में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।

धारा 111 के तहत कड़े प्रावधान और सजा:

फांसी या उम्रकैद: यदि संगठित अपराध के कारण किसी की मृत्यु होती है, तो इस धारा के तहत सजा-ए-मौत (फांसी) या आजीवन कारावास का प्रावधान है, साथ ही कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

साजिशकर्ताओं पर भी शिकंजा: संगठित अपराध की साजिश रचने, उकसाने या इसमें सहायता करने वालों को भी 5 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा मिल सकती है।

पनाह देने वालों पर कार्रवाई: अपराधियों को जानबूझकर पनाह देने या उनकी अवैध संपत्ति छिपाने वालों पर भी कड़ी जेल की सजा और भारी जुर्माने का शिकंजा कसेगा।

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