Prayagraj/ Rampur, UP (29 अक्टूबर 2026) : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने दोनों की सजा पर रोक (सस्पेंशन) लगाते हुए उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। इस आदेश के बाद रामपुर जेल में बंद पिता-पुत्र के जल्द ही सलाखों से बाहर आने की उम्मीद है। उनके अधिवक्ताओं के अनुसार, जमानत मुचलके और सत्यापन की कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद अगले दो-तीन दिनों में उनकी रिहाई संभव हो सकती है।
मामले का पूरा घटनाक्रम और कानूनी पहलू
दो पैन कार्ड मामला – मुख्य विवरण
• राहत का आदेश : इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सजा निलंबित और जमानत मंजूर
• कानूनी स्थिति : 17 नवंबर 2025 से रामपुर जेल में बंद थे आजम खान और अब्दुल्ला आजम
• विवादित मामला : अब्दुल्ला आजम के नाम पर दो अलग-जन्म तिथियों वाले पैन कार्ड का कथित उपयोग
• निचली अदालत की सजा : नवंबर 2025 में एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा 7 साल की सजा (मई 2026 में बढ़ाकर 10 साल)
• शिकायतकर्ता : भाजपा नेता आकाश सक्सेना (सिविल लाइंस थाना, रामपुर, दिसंबर 2019)
क्या है पूरा ‘दो पैन कार्ड’ मामला?
यह पूरा विवाद अब्दुल्ला आजम खान के नाम पर कथित रूप से दो अलग-अलग जन्म तिथियों वाले पैन कार्ड बनवाने और उनके इस्तेमाल से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार: एक पैन कार्ड में अब्दुल्ला आजम की जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी, जबकि दूसरे पैन कार्ड में यह 30 सितंबर 1990 थी। आरोप था कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल विभिन्न आधिकारिक और शैक्षणिक कार्यों में किया गया।
दिसंबर 2019 में भाजपा नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर रामपुर के सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
निचली अदालत से सजा और हाईकोर्ट का रुख
सजा का ऐलान: नवंबर 2025 में रामपुर की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट अदालत ने दोनों को दोषी मानते हुए सात-सात साल कैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।
सजा में बढ़ोतरी: इसके बाद रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की अपील पर सुनवाई करते हुए मई 2026 में आजम खान की सजा सात साल से बढ़ाकर दस साल कर दी थी।
हाईकोर्ट में चुनौती: निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम की ओर से हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिकाएं दाखिल की गईं। 14-15 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए हाईकोर्ट ने उनकी सजा निलंबित कर दी है।
हालांकि, इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद आजम खान की कानूनी मुश्किलें पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में उनके खिलाफ कई अन्य मामले भी दर्ज हैं।



