Lucknow/ UP (25 अक्टूबर 2026): उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट के बीच सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दोनों दलों के बीच सीट-बंटवारे (Seat Sharing) को लेकर औपचारिक ऐलान से पहले ही लखनऊ की सड़कों पर लगे एक नए पोस्टर ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। इस पोस्टर के जरिए कांग्रेस ने 200 सीटों पर अपना दावा ठोकते हुए समाजवादी पार्टी पर दबाव की राजनीति तेज कर दी है।
लखनऊ में लगे पोस्टर: “200 सीट हक है हमारा, यूपी को है राहुल गांधी पर भरोसा”
राजधानी लखनऊ में कांग्रेस पार्टी की ओर से लगाए गए इन पोस्टरों ने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है:
शीर्ष नेताओं की तस्वीरें: इन पोस्टरों पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद और यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की तस्वीरें प्रमुखता से छपी हैं।
बराबरी के हक का संदेश: पोस्टर के मुख्य स्लोगन में लिखा गया है— ‘200 सीट हक है हमारा, यूपी को है राहुल गांधी पर भरोसा।’ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में मिले बेहतर परिणामों के बाद कांग्रेस अब यूपी विधानसभा चुनाव में भी सम्मानजनक और बड़ी हिस्सेदारी चाहती है।
175 सीटों की सूची और अखिलेश यादव का रुख
इससे पहले राजनीतिक गलियारों में यह जानकारी सामने आई थी कि कांग्रेस पार्टी ने सपा को 175 सीटों की एक सूची सौंपी है। हालांकि, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में रामपुर दौरे के दौरान कहा था कि कांग्रेस की तरफ से लिस्ट मिली है, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं में सच्चाई कितनी है, यह अलग बात है।
अखिलेश यादव ने यह भी साफ संकेत दिए थे कि गठबंधन का मुख्य लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराना होना चाहिए, और सीटों का बटवारा केवल मांग के आधार पर नहीं बल्कि ‘विनेबिलिटी’ (उम्मीदवार की जीत की संभावना) के आधार पर तय होना चाहिए। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी यूपी में कांग्रेस को 50 से 70 सीटों से अधिक देने के मूड में नजर नहीं आ रही है, ऐसे में कांग्रेस का यह 200 सीटों का सार्वजनिक दावा दोनों दलों के बीच तनातनी को और बढ़ा सकता है।
गठबंधन पर संशय और आगे की राह
कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की रूपरेखा तय करने के लिए एक संयुक्त कमेटी बनाए जाने की चर्चाएं भी चल रही थीं, लेकिन इस प्रकार के पोस्टरों के सामने आने के बाद जमीनी स्तर पर असहजता बढ़ती दिखाई दे रही है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की तरफ से अभी तक इस पर कोई तीखी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में सीट बंटवारे का यह फॉर्मूला दोनों दलों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।



