New Delhi (12 अक्टूबर 2026): मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन चरम पर पहुँच गया है। सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के वरिष्ठ सांसद बस में सवार होकर दिल्ली के बाराखंबा मेट्रो स्टेशन पहुँचे, जहाँ से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक विशाल मार्च निकालने का आह्वान किया। मौके पर हज़ारों की संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता मौजूद हैं।
बाराखंबा से मंडी हाउस तक सड़कों पर जनसैलाब, पुलिस बैरिकेड्स से तनाव
बाराखंबा मेट्रो स्टेशन से मंडी हाउस की ओर जाने वाली सड़क पर प्रदर्शनकारियों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े बैरिकेड्स लगाए हैं, जहाँ प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प और टकराव के आसार बने हुए हैं।
यह मार्च चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान और 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में निकाला जा रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त सत्ताधारी दल के पक्ष में चुनावी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
10 महीनों में 14 बार आपत्तियां: इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे से भड़का विवाद
विरोध प्रदर्शन की आग अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट के बाद और भड़क गई। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग द्वारा लिए गए निर्णयों पर 14 बार गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों को अंधेरे में रखकर नए मतदाताओं को जोड़ने और हटाने की प्रक्रियाओं को “अनधिकृत और गैरकानूनी” तरीके से अंजाम दिया गया।
दो दिनों से दिल्ली में दमन: धारा 144, इंटरनेट पाबंदी और भारी गिरफ्तारियां
इससे पहले 10 और 11 अक्टूबर को सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में भारी पुलिस बल तैनात कर पूरे लुटियंस ज़ोन को छावनी में बदल दिया गया था। सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया था, जबकि अर्थशास्त्री ज्याँ द्रेज़ को भी प्रदर्शन स्थल पर बैठने नहीं दिया गया।
45 से अधिक मेट्रो स्टेशनों के दरवाजे बंद किए जाने, इंटरनेट पाबंदियों और धारा 144 के कारण शनिवार और रविवार को सेंट्रल दिल्ली में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा। दो दिनों में 7,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। विपक्षी दलों का साफ कहना है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह लड़ाई सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़कों तक जारी रहेगी।



