Muzaffarnagar/ UP (29 अक्टूबर 2026) : उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर स्थित ऐतिहासिक राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) मैदान में बुधवार (28 अक्टूबर 2026) को ‘सामाजिक न्याय पार्टी (जनादेश)’ के बैनर तले एक विशाल महारैली का आयोजन किया गया। इस महारैली में सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली, निजी वाहनों और बसों में सवार होकर भारी जनसैलाब उमड़ा। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं मुख्य वक्ता के रूप में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर देवेंद्र कश्यप ने अति-पिछड़ों, महादलितों और वंचित समाज के हक, सम्मान और हिस्सेदारी को लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 403 सीटों पर मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ने की घोषणा की, जिससे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
महारैली और जनसभा का मुख्य विवरण
सामाजिक न्याय पार्टी महारैली – मुख्य बिंदु
• स्थान एवं तिथि : जीआईसी मैदान, मुजफ्फरनगर (28 अक्टूबर 2026)
• मुख्य वक्ता : ई. देवेंद्र कश्यप (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सामाजिक न्याय पार्टी – जनादेश)
• मुख्य मांगें : रोहिणी आयोग और राघवेंद्र कमेटी की रिपोर्ट लागू करना, अति-पिछड़ों को आरक्षण में हिस्सेदारी
• चुनावी घोषणा : उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर वृहद मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ने का दावा
• प्रमुख उपस्थिति : कश्यप समाज, अति-पिछड़े, महादलित वर्ग एवं विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि

राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर देवेंद्र कश्यप के संबोधन के प्रमुख अंश
जनसभा को संबोधित करते हुए ई. देवेंद्र कश्यप ने सत्तारूढ़ दल और प्रमुख विपक्षी दलों पर तीखा जुबानी हमला बोला:
77 दिनों का धरना और वादाखिलाफी: उन्होंने कहा कि अति-पिछड़े एवं महादलित समाज के आरक्षण वर्गीकरण की मांग को लेकर चलाए जा रहे 77 दिवसीय धरने के बाद सरकार ने ‘रोहिणी कमीशन’ तथा ‘राघवेंद्र कमेटी’ की सिफारिशों को लागू करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, लंबे समय के बाद भी इसे धरातल पर लागू नहीं किया गया।
2027 में सत्ता परिवर्तन का आह्वान: देवेंद्र कश्यप ने हुंकार भरते हुए कहा कि जिस समाज के समर्थन से सरकारें बनती आई हैं, अब वह अपनी हिस्सेदारी खुद तय करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सभी 403 सीटों पर नया मोर्चा चुनाव लड़ेगा और जल्द ही लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटक दलों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
80 वर्षों के राजनीतिक वनवास का अंत: उन्होंने कहा कि पिछले 80 वर्षों से वंचितों को उनका वाजिब हक नहीं मिला है। अब अधिकारों को मांगने के बजाय सत्ता में भागीदारी हासिल करके अपने प्रतिनिधियों को विधानसभा और संसद भेजने की रणनीति पर काम किया जाएगा।



