New Delhi (29 अक्टूबर 2026): दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी और पटाखों के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गहन सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना वी. बराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान वायु प्रदूषण की विकराल होती समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल प्रतिवर्ष अदालती आदेश जारी करना अब एक ‘अकेडमिक प्रैक्टिस’ बनकर रह गया है, क्योंकि जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन कम और उल्लंघन अधिक देखने को मिलता है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और मुख्य पक्षों की दलीलें
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई – मुख्य बिंदु
• पीठ (Bench) : जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना वी. बराले
• मुख्य टिप्पणी : आदेश जारी करना काफी नहीं; प्रभावी क्रियान्वयन और दीर्घकालिक नवाचार की जरूरत
• विशेष सुझाव : युवाओं को जागरूक करने के लिए विराट कोहली जैसी हस्तियों को अभियान में शामिल करें
• स्वास्थ्य चेतावनी : गैर-धूम्रपान करने वाले युवाओं के फेफड़ों में काले धब्बे और कैंसर के मामले बढ़े
• कारोबारियों का तर्क : पूर्ण प्रतिबंध से अवैध तस्करी बढ़ी; ग्रीन पटाखों को मानक अनुसार अनुमति मिले
अदालत की सख्त टिप्पणियां और अमाइकस क्यूरी की चेतावनी
विराट कोहली जैसे रोल मॉडल का जिक्र: सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि समाज को वायु प्रदूषण के प्रति जागरूक करने के लिए केवल कानूनी पाबंदियां पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को क्रिकेटर विराट कोहली जैसी युवाओं में बेहद लोकप्रिय हस्तियों को पर्यावरण जागरूकता अभियानों से जोड़ना चाहिए ताकि जनसामान्य तक प्रभावी संदेश पहुंचे।
चेस्ट एक्सपर्ट्स की चौंकाने वाली रिपोर्ट: अदालत की सहायता कर रहे अमाइकस क्यूरी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि दिल्ली में कभी धूम्रपान न करने वाले किशोरों के फेफड़ों में भी प्रदूषण (PM 2.5) के कारण काले धब्बे दिखाई दे रहे हैं।
‘ग्रीन पटाखे’ भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं: अमाइकस क्यूरी ने स्पष्ट किया कि तथाकथित ग्रीन पटाखे प्रदूषण को थोड़ा कम जरूर कर सकते हैं, लेकिन वे पूरी तरह हानिरहित नहीं हैं। जब तक सख्त निगरानी प्रणाली स्थापित न हो, तब तक ढील देना घातक होगा।
पटाखा कारोबारी और सरकार का रुख
पटाखा निर्माताओं की दलील: कारोबारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जे. साई दीपक ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध के कारण अवैध आतिशबाजी और ब्लैक मार्केट को बढ़ावा मिला है। उन्होंने मांग की कि वैज्ञानिक संस्थाओं के मानकों के अनुरूप ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री को विनियमित किया जाना चाहिए।
केंद्र व दिल्ली सरकार का पक्ष: एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को अवगत कराया कि राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए 1 नवंबर से गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर रोक, सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव, 608 एंटी-स्मॉग गन की तैनाती और निर्माण स्थलों पर सख्त निगरानी जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं।



