Lucknow/UP (29 अक्टूबर 2026) : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता, सुरक्षा और अनुशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चरित्र सत्यापन (Character Verification) नीति में बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए शासनादेश के अनुसार, यदि कोई अभ्यर्थी हिंसा के बल पर व्यवस्था परिवर्तन या ‘रिजीम चेंज’ (Regime Change) करने वाले संगठनों से जुड़ा पाया जाता है, तो उसे सरकारी नौकरी के लिए पूरी तरह से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि, शासन ने स्पष्ट किया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।
नई चरित्र सत्यापन नीति की मुख्य बातें और नियम
चरित्र सत्यापन नीति 2026 – मुख्य प्रावधान
• प्रमुख प्रतिबंध : ‘रिजीम चेंज’, हिंसा, आतंकवादी कृत्य, पेपर लीक व सॉल्वर गैंग में लिप्तता पर पूर्ण रोक
• अपराधों की श्रेणी : हत्या, डकैती, बलात्कार, लज्जा भंग, भ्रष्टाचार के मामलों में कड़ी अयोग्यता
• समय-सीमा : 21 वर्ष की आयु के बाद 3 वर्ष के भीतर हिंसात्मक गतिविधियों में भागीदारी पर रोक
• सत्यापन प्रक्रिया : 30 दिनों में LIU/पुलिस रिपोर्ट अनिवार्य; घर जाकर भौतिक पूछताछ की बाध्यता खत्म
• प्राकृतिक न्याय : केवल FIR दर्ज होने से अयोग्यता नहीं; प्रतिकूल रिपोर्ट पर अभ्यर्थी को मिलेगा पक्ष रखने का मौका
प्रमुख बिंदु एवं कानूनी स्पष्टता
प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक) एम. देवराज द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जारी इस शासनादेश में कई पारदर्शी प्रावधान जोड़े गए हैं:
सख्त अयोग्यता के मानक: हत्या, डकैती, बलात्कार, महिलाओं के खिलाफ अपराध, भ्रष्टाचार, आतंकवादी गतिविधियों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘पेपर लीक’ और ‘सॉल्वर गैंग’ से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए सरकारी सेवाओं के दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।
समय सीमा का पैमाना: शासनादेश के तहत यदि कोई व्यक्ति 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद जांच की तिथि से तीन वर्ष के भीतर किसी ‘रिजीम चेंज’ या हिंसक गतिविधि में शामिल रहा है, तो उसे इस बात का स्पष्ट प्रमाण माना जाएगा कि वह अब भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय है।
पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया: स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) और जिला पुलिस को सत्यापन प्रक्रिया शुरू होने के 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट नियुक्ति प्राधिकारी को सौंपनी होगी। इसकी निगरानी सीधे गृह विभाग द्वारा की जाएगी।
नागरिक अधिकार व सहूलियत: पुलिस या एलआईयू सत्यापन के लिए अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेगी और न ही अभ्यर्थी की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। इसके अलावा, केवल एफआईआर (FIR) दर्ज होने या जांच लंबित रहने से ही अभ्यर्थी को अयोग्य नहीं माना जाएगा। यदि रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी द्वारा फैसला लेने से पूर्व अभ्यर्थी को ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।



