Gautam Budh Nagar,UP(28 अक्टूबर 2026) : उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा से खाकी वर्दी को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सेक्टर-63 में अपनी बाइक किनारे खड़ी कर के बैठे हर्षित शर्मा नाम के युवक को पुलिसकर्मियों की दबंगई का शिकार होना पड़ा। पहले युवक की गाड़ी की चाबी छीनी गई, गाली-गलौज का विरोध करने पर वीडियो डिलीट कराया गया और फिर H-Block चौकी ले जाकर पुलिस द्वारा लात-घूसों से पीटा गया।
हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद जब जब पीड़ित युवक ने आपातकालीन पुलिस सेवा 112 पर मदद मांगी, तो कोई पुलिसकर्मी नहीं पहुंचा। अंततः पीड़ित को खुद एम्बुलेंस बुलाकर नोएडा के निजी अस्पताल में उपचार कराया,
नौकरी की तलाश में आया था पीड़ित! चाबी छीनने से चौकी में पिटाई तक: जानें क्या हुआ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बदायूं निवासी पीड़ित युवक हर्षित शर्मा नोएडा में नौकरी की तलाश में आया हुआ था। सेक्टर-63 में उसकी मोटरसाइकिल सड़क किनारे केवल खड़ी थी। इसी दौरान गश्त कर रहे पुलिसकर्मी—जिनमें 2-स्टार दरोगा सतीश कुमार, ट्रैफिक पुलिसकर्मी बलवेंद्र मौर्य और एक अन्य सिपाही शामिल थे—वहां पहुंचे और आते ही युवक की बाइक की चाबी निकाल ली।
गाली-गलौज और वीडियो डिलीट: जब युवक ने विनम्रता से अपनी चाबी मांगी, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसके साथ अभद्र भाषा और गालियों का प्रयोग शुरू कर दिया। खुद को कानूनी रूप से सुरक्षित करने के लिए युवक ने मोबाइल निकालकर पुलिसकर्मियों की हरकत का वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
मोबाइल छीनकर कस्टडी में मारपीट: वीडियो बनता देख बौखलाए पुलिसकर्मियों ने जबरन उसका मोबाइल छीन लिया और वीडियो डिलीट कर दिया। इसके बाद युवक को पुलिस जीप में बैठाया और H-Block चौकी ले जाकर लात-घूसों से बर्बरतापूर्वक पीटा गया।
अस्पताल में इलाज: चौकी से छोड़े जाने के बाद युवक की हालत बिगड़ गई। उसने तुरंत ‘112’ पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल किया, लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी कोई सहायता नहीं मिली। अंततः युवक ने खुद 108 एम्बुलेंस को कॉल किया और नोएडा के निजी अस्पताल पहुँचा। जहाँ इलाज के बाद उसे घर भेज दिया गया l
कानून क्या कहता है? आम नागरिक और पुलिस के अधिकार
इस पूरे घटनाक्रम ने ट्रैफिक नियमों, नागरिक अधिकारों और पुलिस की शक्तियों पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं:
1. क्या पुलिस के पास गाड़ी की चाबी छीनने या मारपीट का अधिकार है?
मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act): यदि कोई वाहन गलत दिशा में खड़ा है, तो पुलिस अधिकारी नियम उल्लंघन का चालान (Challan) काट सकते हैं या वाहन को टो (Tow) कर सकते हैं। किसी भी पुलिसकर्मी को वाहन की चाबी छीनने, जबरन गाड़ी से उतारने या चाबी निकालने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
मानवाधिकार एवं कस्टडी नियम: कानून के तहत पुलिस का काम अपराध दर्ज करना और चालान काटना है, सजा देना या मारपीट करना नहीं। थाने में या कस्टडी में मारपीट करना पूरी तरह से असंवैधानिक और मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
2. यदि पुलिस मारपीट करे, तो उनके लिए कानून में क्या सजा का प्रावधान है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत आरोपी पुलिसकर्मियों पर निम्नलिखित गंभीर धाराएं लागू होती हैं:
स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना (BNS Section 117 / IPC 323/325): कस्टडी में मारपीट करने पर दोषी पुलिसकर्मियों को 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
लोक सेवक द्वारा शक्ति का दुरुपयोग एवं गलत निरोध (BNS Section 127 / IPC 342): बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी को जीप में बैठाकर थाने में बंद करना अवैध हिरासत (Illegal Detention) की श्रेणी में आता है।
साक्ष्य मिटाना (BNS Section 238 / IPC 201): नागरिक के फोन से जबरन वीडियो डिलीट करना सबूत मिटाने का अपराध है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइन (DK Basu Case): सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार, यदि कस्टडी में किसी नागरिक के साथ मारपीट होती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज होगी और उन्हें निलंबित (Suspend) कर विभागीय जांच के साथ जेल भेजा जा सकता है।
3. क्या आम नागरिक पुलिस की कार्यशैली का वीडियो बना सकता है?
जी हाँ, बिल्कुल। सार्वजनिक स्थान पर ड्यूटी कर रहे किसी भी सरकारी कर्मचारी या पुलिसकर्मी का वीडियो बनाना कोई अपराध नहीं है। यह नागरिक का अधिकार है ताकि वह भ्रष्टाचार या दुर्व्यवहार का प्रमाण रख सके। पुलिस जबरन फोन नहीं छीन सकती और न ही वीडियो डिलीट करवा सकती है।


