रायपुर: छत्तीसगढ़ के इतिहास और संस्कृति के लिहाज से एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य के प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल ‘सिरपुर’ (Sirpur) को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर की संभावित (Tentative) सूची में शामिल कर लिया गया है। महानदी के पावन तट पर बसा यह ऐतिहासिक स्थल प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक सह-अस्तित्व का एक बेजोड़ नमूना है, जिसे लेकर अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सिरपुर का इतिहास और सांस्कृतिक वैभव:

5वीं से 12वीं शताब्दी का स्वर्णिम काल: प्राचीन काल में ‘श्रीपुर’ के नाम से विख्यात यह स्थल दक्षिण कौशल की राजधानी हुआ करता था। 5वीं से 12वीं सदी के दौरान यह कला, धर्म और व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था।
धार्मिक सह-अस्तित्व की अनूठी मिसाल: सिरपुर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों के प्राचीन अवशेष और मंदिर एक साथ मिलते हैं, जो प्राचीन भारत की सर्वधर्म समभाव संस्कृति को दर्शाते हैं।
प्रमुख पुरातात्विक आकर्षण:
प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर: लाल ईंटों से निर्मित यह भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर नागर शैली की उत्कृष्ट नक्काशी का अद्भुत उदाहरण है।
बौद्ध विहार: 7वीं शताब्दी में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस नगर की यात्रा की थी। खुदाई में यहाँ कई विशाल बौद्ध मठ और विहार मिले हैं।
सुरंग टीला और गंधेश्वर मंदिर: महानदी के तट पर स्थित गंधेश्वर महादेव मंदिर और वास्तुकला का नायाब नमूना ‘सुरंग टीला’ पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं।
इस उपलब्धि के मायने:
ग्लोबल टूरिज्म को बढ़ावा: यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में नाम दर्ज होने से सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी, जिससे छत्तीसगढ़ में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी।
बेहतर संरक्षण: इस सूची में आने के बाद इस ऐतिहासिक धरोहर के वैज्ञानिक संरक्षण और विकास के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर फंडिंग व प्रयास तेज हो जाएंगे।
सिरपुर का यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक महत्व और समृद्ध इतिहास की बड़ी जीत है। यह कदम राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करेगा।



