New Delhi (17 अक्टूबर 2026): ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ के दौरान हिरासत में ली गई ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने आरके पुरम पुलिस स्टेशन से रिहा कर दिया। बाहर आते ही नेहा बोरा ने सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि देश में आम नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।
“आरके पुरम थाने में रात भर अवैध रूप से रखा गया”
नेहा बोरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) और मीडिया से बातचीत में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया:
वकीलों से मिलने पर रोक: हिरासत के बाद उन्हें लगभग 5 से 6 घंटे तक कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने की इजाजत नहीं दी गई।
सूर्यास्त के बाद महिलाओं की हिरासत पर सवाल: उन्होंने कहा कि कानूनन महिलाओं को सूर्यास्त के बाद पुलिस स्टेशन में रखना गलत है, फिर भी उन्हें पूरी रात आरके पुरम थाने में रखा गया।
अभिजीत दीपके की रिहाई की मांग: नेहा ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग की।
“अराजकता और अव्यवस्था का नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। असली अराजकता सेंट्रल दिल्ली में फैलाई गई है, जहाँ आम लोगों का निकलना दूभर हो गया है। ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाया जाए और एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए।”
– नेहा बोरा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, AISA)
दीपांकर भट्टाचार्य और विपक्षी नेताओं ने साधा निशाना
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नेहा बोरा की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस की ऐसी दमनकारी और क्रूर हरकतें जनता के प्रतिरोध को कमजोर करने के बजाय और मजबूत करेंगी।
इससे पहले ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, एमके स्टालिन और अखिलेश यादव जैसे प्रमुख विपक्षी नेताओं ने नेहा बोरा और अभिजीत दीपके की लोकेशन सार्वजनिक न करने पर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे और इसे ‘अघोषित आपातकाल’ करार दिया था।



