Home » राष्ट्रीय » दिल्ली पुलिस और विरोध-प्रदर्शन की अनुमति: क्या यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है?

दिल्ली पुलिस और विरोध-प्रदर्शन की अनुमति: क्या यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है?

Rahul Gandhi
Facebook
X
WhatsApp

New Delhi: हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन, संसद मार्ग स्थित आकाशवाणी भवन के पास नेताओं को हिरासत में लिए जाने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमतियों को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है। विपक्ष और कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि Delhi Police केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों की अनुमति न देकर संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है।

इस विवाद ने भारतीय संविधान, पुलिस के अधिकारों और लोकतंत्र में विरोध की जगह को लेकर कई संवैधानिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या कहता है भारतीय संविधान?

भारतीय संविधान नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने की स्पष्ट आजादी देता है: अनुच्छेद 19(1)(a): भारत के हर नागरिक को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) प्रदान करता है। अनुच्छेद 19(1)(b): नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के एकत्र होने (Right to Assemble Peacefully) की गारंटी देता है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: ‘मज़दूर किसान शक्ति संगठन’ मामला

सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है। मज़दूर किसान शक्ति संगठन बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया (2018) मामले में सुप्रीम कोर्ट (पैराग्राफ 61) ने कहा था “निस्संदेह, लोगों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन और विरोध करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत दिया गया मौलिक अधिकार है।”मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का भी कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार किसी सरकार की पूर्व-अनुमति पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों द्वारा संरक्षित है।

विरोध-प्रदर्शन पर पुलिस रोक कैसे और किस आधार पर लगा सकती है?

संविधान में दिए गए अधिकार असीमित (Absolute) नहीं हैं। संविधान स्वयं पुलिस और प्रशासन को ‘युक्तियुक्त प्रतिबंध’ (Reasonable Restrictions) लगाने का अधिकार देता है:अनुच्छेद 19(2): अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के आधार तय करता है (जैसे- भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था/Law & Order, न्यायालय की अवमानना, मानहानि आदि)। अनुच्छेद 19(3): शांतिपूर्ण सभा के अधिकार पर केवल “लोक व्यवस्था (Public Order)” और “भारत की संप्रभुता एवं अखंडता” के आधार पर ही उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसलिए, किसी विशिष्ट समय, मार्ग या सुरक्षा कारणों से प्रदर्शन की अनुमति न देना अनुच्छेद 19 का पूर्ण निलंबन नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक प्रतिबंध माना जाता है। शर्त यह है कि यह प्रतिबंध मनमाना (Arbitrary) न होकर कानूनी रूप से तर्कसंगत होना चाहिए।

पुलिस के रुख पर उठ रहे मुख्य सवाल और कानूनी विशेषज्ञों की राय

1. पक्षपात और राजनीतिक भेदभाव के आरोप

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ताधारी दल के कार्यक्रमों और विपक्ष के प्रदर्शनों में दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। पक्षपात का आरोप: कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब सत्ताधारी पार्टी को रैली या प्रदर्शन करना होता है तो अनुमति तुरंत मिल जाती है, जबकि विपक्ष की मांगों पर सुरक्षा या ‘कानून-व्यवस्था’ का हवाला देकर रोक लगा दी जाती है। संविधान का अनुपालन: पूर्व गृह सचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को संविधान और कानून के अनुसार काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दबाव में।

2. पूर्व-अनुमति (Prior Permission) बनाम अधिकार

विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस का काम शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को प्रबंधित करना और सुरक्षा देना है, न कि राजनीतिक आलोचना को दबाने के लिए अनुमति देने से ही इनकार कर देना। राजनीतिक आलोचना को ‘कानून-व्यवस्था के खतरे’ के रूप में नहीं देखा जा सकता।

निष्कर्ष

एक जीवंत लोकतंत्र में विरोध और असहमति दर्ज कराना नागरिकों का बुनियादी हक है। New Delhi में पुलिस या कोई भी प्रशासनिक निकाय सुरक्षा कारणों या ट्रैफिक व्यवस्था का हवाला देकर प्रदर्शन का स्थान या समय बदल सकता है, लेकिन बिना किसी ठोस और कानूनी कारण के शांतिपूर्ण विरोध को पूरी तरह रोकना संवैधानिक अधिकारों की भावना के विपरीत है। प्रतिबंध केवल तभी वैध ठहराए जा सकते हैं जब वे संविधान की कसौटी और ‘युक्तियुक्त प्रतिबंध’ के दायरे में आते हों।

How to Get AdSense Approval for News a Portal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

News Portal Development Services in Uttar Pradesh

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें