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महराजगंज में किसान दिवस : पराली जलाने पर कार्रवाई की चेतावनी, खाद की टैगिंग और महंगे दाम पर बिक्री का मुद्दा उठा।

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– विकास भवन में सीडीओ की अध्यक्षता में हुई बैठक।
– किसानों ने यूरिया-डीएपी की उपलब्धता और कृषि निवेशों की समस्याएं उठाई।
– रबी सीजन के बीज सभी विकास खंडों में उपलब्ध होने की जानकारी दी गई।

महराजगंज : किसानों की समस्याओं के समाधान, कृषि निवेशों की उपलब्धता और आगामी रबी सीजन की तैयारियों को लेकर विकास भवन सभागार, महराजगंज में किसान दिवस का आयोजन किया गया। मुख्य विकास अधिकारी की
महेंद्र कुमार सिंह अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि एवं कृषि से जुड़े विभिन्न विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। बैठक में किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उर्वरक वितरण, खाद की बिक्री, फसल अवशेष प्रबंधन और कृषि उत्पादकता बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

पराली जलाने से बचें किसान, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी

किसान दिवस के दौरान उप कृषि निदेशक ने किसानों को धान की पराली न जलाने के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। पराली जलाने से भूमि में मौजूद उपयोगी सूक्ष्मजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे लंबे समय में खेती की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली के उचित प्रबंधन के उपाय अपनाएं और अन्य किसानों को भी इसके लिए जागरूक करें। उन्होंने बताया कि शासन-प्रशासन माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के प्रभावी अनुपालन के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में पराली जलाने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने किसानों से पर्यावरण संरक्षण के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।

ज्यादा खाद डालना अधिक पैदावार की गारंटी नहीं : सुनील गुप्ता।

बैठक में एआर कोऑपरेटिव सुनील गुप्ता ने उर्वरकों के वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेतों में जरूरत से ज्यादा खाद डालना अधिक उत्पादन की गारंटी नहीं है। इसके विपरीत, उर्वरकों का असंतुलित इस्तेमाल फसल और भूमि की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकता है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मिट्टी की जरूरत और फसल की आवश्यकताओं के अनुरूप ही उर्वरकों का प्रयोग करें, ताकि उत्पादन बेहतर होने के साथ भूमि की उर्वरता भी बनी रहे।

यूरिया-डीएपी की टैगिंग और निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री का मुद्दा उठा।

किसान दिवस में किसानों ने उर्वरकों की उपलब्धता और बिक्री से जुड़ी समस्याएं भी अधिकारियों के सामने रखीं। विकास खंड मिठौरा के ग्राम बरवा राजा निवासी किसान अजय चौरसिया ने यूरिया एवं डीएपी के साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की टैगिंग किए जाने तथा निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उर्वरक बिक्री की समस्या उठाई।

वहीं, विकास खंड सिसवा के ग्राम परसा गिदही निवासी किसान रमेश चन्द्र पटेल ने उर्वरकों की उपलब्धता और किसानों को उनकी भूमि एवं आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने का मुद्दा रखा।

इसके अलावा, विकास खंड सदर के ग्राम नेता सुरहुरवां निवासी किसान संतराज यादव ने खाद, बीज और उद्यान विभाग से संबंधित कृषि निवेश समय से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। किसानों की इन समस्याओं के माध्यम से उर्वरक वितरण व्यवस्था और कृषि सामग्री की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

रबी सीजन के बीज उपलब्ध, किसानों से विभागों से संपर्क करने की अपील

बैठक में किसानों को जानकारी दी गई कि वर्तमान रबी सीजन के लिए दलहन, तिलहन और गेहूं के बीज के साथ दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बीज मिनीकिट जनपद के सभी विकास खंडों में उपलब्ध हो गई हैं।

किसानों से अपील की गई कि वे संबंधित विभागों से संपर्क कर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार बीज और अन्य कृषि निवेश प्राप्त करें, ताकि बुवाई के समय उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। रबी सीजन की तैयारियों को समय से पूरा करने और उपलब्ध संसाधनों का लाभ उठाने पर भी जोर दिया गया।

कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद।

किसान दिवस में भूमि संरक्षण अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, इफको एवं नाबार्ड के जिला प्रबंधक, मत्स्य, उद्यान, गन्ना, खाद्य एवं रसद, सिंचाई, विद्युत और दुग्ध विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए। इसके साथ ही अग्रणी बैंक प्रबंधक तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।

बैठक का उद्देश्य किसानों की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाना, कृषि निवेशों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा करना और खेती को अधिक वैज्ञानिक एवं लाभकारी बनाने के लिए जागरूकता बढ़ाना रहा। किसान दिवस में उठाए गए उर्वरक वितरण, मूल्य और उपलब्धता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

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