New Delhi: पश्चिमी एशिया (Middle East) में गहराता सुरक्षा संकट अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुँचता दिख रहा है। सऊदी अरब के हवाई अड्डों और रियाद (Riyadh Airport) पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यह खबर सामने आई है कि पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के लड़ाकू विमानों ने हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई हमलों में हिस्सा लिया है। हालाँकि, पाकिस्तान सरकार और सेना ने इन दावों को पूरी तरह से ‘झूठा और मनगढ़ंत’ (Fake and Fabricated) बताते हुए खारिज कर दिया है।
‘मक्का रक्षा समझौते’ के तहत बढ़ा तनाव
हाल ही में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौता’ (Mecca Joint Defense Agreement) सक्रिय हुआ है। इस समझौते के तहत किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब की रक्षा के लिए लगभग 8,000 पाकिस्तानी सैनिक और लड़ाकू विमान (जैसे JF-17) तैनात किए गए हैं। यमन में हूतियों के खिलाफ हुई इस संभावित एयर स्ट्राइक को इसी रक्षा संधि के क्रियान्वयन के रूप में देखा जा रहा है। इसके बावजूद, पाकिस्तान के विदेश और रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उनकी मौजूदगी केवल रक्षात्मक और सहायक (Defensive & Support) प्रकृति की है, न कि किसी प्रत्यक्ष युद्ध अभियानों के लिए।
ईरान और हूती विद्रोहियों का कड़ा रुख
हूती विद्रोही समूह, जिसे ईरान का सीधा समर्थन प्राप्त है, ने पाकिस्तान और तुर्की के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हूती प्रवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी विदेशी ताकत उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होती है, तो उसे यमन के लोगों पर उत्पीड़न का भागीदार माना जाएगा और इसका करारा जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर, इस घटनाक्रम से तेहरान (ईरान) और इस्लामाबाद (पाकिस्तान) के बीच कूटनीतिक दरार बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पाकिस्तान प्रत्यक्ष रूप से हूतियों पर बमबारी करता है, तो ईरान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव और शिया-सुन्नी क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।



