New Delhi: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को पुलिस हिरासत के बाद रिहा कर दिया गया है. रिहा होने के तुरंत बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला और तेज़ कर दिया है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राहुल गांधी ने लिखा कि इंडिया गठबंधन के सांसद लोकतंत्र की रक्षा के लिए संसद से लेकर सड़कों तक एकजुट हैं. उन्होंने कहा, “वे हमारा मार्च रोक सकते हैं और बैठकों से इनकार कर सकते हैं, लेकिन लोगों की आवाज़ को नहीं दबा सकते. नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार और पूरी व्यवस्था को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा.”
जंतर-मंतर जाते समय पुलिस ने रोका
इससे पहले बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा आयोजित लंच के बाद राहुल गांधी और लगभग 300 विपक्षी सांसद बसों में सवार होकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए निकले. हालाँकि, सुरक्षा बलों ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया. इस दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया गया. प्रियंका गांधी ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त से मिलने जा रहे सांसदों के साथ हाथापाई की गई, जिससे उन्हें खरोंचें भी आई हैं.
ज्ञानेश कुमार वैध सीईसी नहीं
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे ज्ञानेश कुमार को ‘वैध मुख्य चुनाव आयुक्त’ नहीं मानते. उन्होंने यह भी बताया कि उनके ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर पर उन्हें कोई डर नहीं है. राहुल के शब्दों में, “हर एफ़आईआर मेरे लिए एक मेडल की तरह है.” विपक्ष का आरोप है कि वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) की आड़ में बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ की जा रही है और चुनाव आयोग सत्ताधारी दल को लाभ पहुँचाने का काम कर रहा है.
बीजेपी का पलटवार
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करके कांग्रेस क्या मृतक और फ़र्ज़ी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में बनाए रखना चाहती है? बीजेपी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी इस मुद्दे पर केवल भ्रम फैलाने की राजनीति कर रहे हैं.



