बुशरा खातून (पटना, बिहार): भोजपुरी भाषा और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गरिमा बनाए रखने के लिए अब सामाजिक स्तर पर अश्लील गीतों के खिलाफ आवाज बुलंद होने लगी है। लोकसंस्कृति और पारंपरिक मूल्यों के लिए पहचानी जाने वाली भोजपुरी भाषा में महिलाओं के प्रति अपमानजनक शब्दों और अश्लील सामग्री के इस्तेमाल पर प्रबुद्ध समाज ने गहरी चिंता जताई है।
सेंसर बोर्ड और नियामक संस्थाओं से सख्त कदम उठाने की अपील
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने सेंसर बोर्ड (CBFC) समेत संबंधित नियामक संस्थाओं से मांग की है कि ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने वाले गानों की कड़ी समीक्षा की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले गानों और आपत्तिजनक सामग्री पर तुरंत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कलाकारों और म्यूजिक कंपनियों को समझनी होगी जिम्मेदारी
गीतकारों, कलाकारों और म्यूजिक म्यूजिक कंपनियों से अपील की गई है कि वे केवल व्यूज और लोकप्रियता के पीछे न भागें, बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझें। संगीत का सीधा प्रभाव बच्चों और युवाओं की मानसिकता पर पड़ता है। ऐसे में मनोरंजन के नाम पर महिलाओं के प्रति फूहड़ता को बढ़ावा देना कतई स्वीकार्य नहीं है।
सकारात्मक और प्रेरणादायक रचनाओं को प्रोत्साहन
भोजपुरी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। छठ पूजा के भक्ति गीतों से लेकर शादी-विवाह के पारंपरिक लोकगीतों तक, भोजपुरी संगीत का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है। जरूरत इस बात की है कि शिक्षा, देशभक्ति, महिला सशक्तिकरण और लोक संस्कृति पर आधारित गानों को बढ़ावा दिया जाए।
भोजपुरी भाषा की गरिमा और सम्मान को वापस लौटाने के लिए समाज, कलाकारों और सरकारी संस्थाओं को एकजुट होकर एक सामूहिक पहल करने की सख्त आवश्यकता है।



